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गांधियन विचार धारा के आर्थिक विचारक :– सदानन्द कुमार आनन्द।

गांधियन विचार धारा के आर्थिक विचारक :– सदानन्द कुमार आनन्द।

जोश भारत न्यूज|बिहार

महात्मा गांधी हमारे राष्ट्रपिता के नामो से विख्यात और प्रख्यात हैं, इनके द्वारा भारत देश के प्रति अपने इच्छा को  समर्पित है इनके नैतिकता और सादगी का पहचान पूरे विश्व में  निहित है।इनके द्वारा मनुष्य जीवन पर महत्वपूर्ण कसौटियों की चर्चा की गई है ""सत्य परेशान हो सकता है लेकिन पराजित नहीं"" गांधीवादी विचारधारा के  अनुकूल गांधी जी का मानना था कि जहां सत्य है, वहां ईश्वर है तथा नैतिकता है।

नैतिक कानून और कोड इसका आधार है।

अहिंसा का अर्थ होता है प्रेम और उदारता की पराकाष्ठा। गांधी जी के अनुसार अहिंसक व्यक्ति किसी दूसरे को कभी भी मानसिक व शारीरिक पीड़ा नहीं पहुंचता है। यह खुद में तृप्त है गांधीवाद जीवन व समाज का एक समग्र दर्शन है, जोकि राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय घटनाओं पर समरूपता से लागू किया जा सकता है। इस दर्शन का जन्म गांधीजी के विचारों और कार्यों से ही हुआ है । व्यक्ति, समाज तथा राज्य के विषय में उनके विचारों ने ही शान्ति तथा अन्तर्राष्ट्रीय समस्याओं पर उनके उपागम का आधार प्रदान किया है इनका जीवन एक वास्तविक जीवन है गांधीवादी के बुनियादी तत्वों में से सत्य सर्वोपरि है; वे मानते थे कि सत्य ही किसी भी राजनैतिक संस्था, सामाजिक संस्थान इत्यादि की धुरी होनी चाहिए। वे अपने किसी भी राजनैतिक निर्णय को लेने से पहले सच्चाई के सिद्धांतो का पालन अवश्य करते थे। गांधी जी का कहना था “मेरे पास दुनियावालों को सिखाने के लिए कुछ भी नया नहीं है।

मनुष्य की जीवन शैली।

अगर मनुष्य जीवन जीना है तो अतीत से लेकर वर्तमान तथा भविष्य को गंभीरता से गहन करने की जरूरत है। हमारे यह राष्ट विकसित राष्ट्र है जो कि पूरे विश्व से यह भिन्न है।

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