राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय में “सार्वजनिक जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार : चुनौतियाँ एवं अवसर” विषय पर संगोष्ठी आयोजित।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में लघु सिंचाई विभाग, शेखपुरा के अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) शशिकांत कुमार उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में नहरों, सिंचाई व्यवस्था एवं जल संरक्षण के महत्व पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि को सुदृढ़ बनाने के लिए नहरों एवं सार्वजनिक जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा सिंचाई सुविधाओं को मजबूत बनाने तथा किसानों को बेहतर जल उपलब्ध कराने हेतु निरंतर कार्य किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अनेक पुराने तालाब, आहर, पइन एवं नहरें उपेक्षा के कारण अपनी उपयोगिता खोते जा रहे हैं। यदि इन जल संरचनाओं का समय पर संरक्षण एवं पुनर्निर्माण किया जाए, तो जल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से जल संरक्षण एवं सिंचाई व्यवस्था के प्रति जन-जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर डीन अकादमिक डॉ. जयशंकर केसरी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि जल संसाधनों का संरक्षण वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि तकनीकी शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थी जल प्रबंधन एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। उन्होंने सार्वजनिक जल संरचनाओं के संरक्षण को समाज की सामूहिक जिम्मेदारी बताया।
यांत्रिक अभियंत्रण विभाग के विभागाध्यक्ष शिव कुमार रजक ने विद्यार्थियों को सतत विकास, जल प्रबंधन एवं पर्यावरण संतुलन के महत्व के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नहरों एवं सिंचाई प्रणालियों के आधुनिकीकरण से कृषि उत्पादन में वृद्धि होने के साथ-साथ जल की बर्बादी को भी रोका जा सकता है।



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