-->

Translate

गंगा किनारे,गजल पुकारे में जम गये कवि डॉ प्रेमसागर

गंगा किनारे,गजल पुकारे में जम गये कवि डॉ प्रेमसागर

राष्ट्रीय कवि डॉ प्रेमसागर पाण्डेय नित्य दिन नये-नए कृतिमान गढ़ रहे हैं।डॉ प्रेमसागर पाण्डेय,सम्पूर्ण भारत में एक बेहतर व्यकितत्व के रूप में खुद को स्थापित करने में कोई कसर नही छोड़ रहे हैं।आये दिनों अपने सुकृतयो से सुर्खियों में बने रहने का तव्वजो,भारत के सम्पूर्ण पत्रकार को देते रहते हैं।बता दे कि बिहार की राजधानी पटना में स्थापित युथ होस्टल में राज्य के असिस्टेंट कमिश्नर सह बेहतर गजलकार समीर परिमल के आयोजन "गंगा किनारे,गजल पुकारे " में आरा से शहर के साहित्यिक बहुचर्चित नाम राष्ट्रीय कवि डॉ प्रेमसागर पाण्डेय को सम्मान सहित आमंत्रित किया गया और एक साहित्यकार के रूप में सम्मानित भी किया गया।इस कार्यक्रम में कवि जी ने सम्मिलित होकर एक अलग ही माहौल बना दिया।कवि जी ने जब पढ़ा कि"बात ये नही की बात नही की बात नही,बात करने की अब बात नही,बात तो बहोत करनी है दिल की,लेकिन जो बात थी अब वो बात नहीं" तो मानो एक जनसैलाब की करतल ध्वनियों का बोध हुआ हो।इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से बिहार सरकार के उद्योग विभाग के विशेष सचिव दिलीप कुमार ,अंतराष्ट्रीय लेखिका ममता मेहरोत्रा,शिक्षाविद एवं शायर कासिम खुर्शीद ,आई.आर.एस. असलम हसन ,आई.पी.एस. धुर्व गुप्ता जी सम्मिलित हुए और हिंदी, उर्दू साहित्य के माध्यम स सार्थक जीवन को यथार्थ करने की दिशा को प्रदर्शित किये।कवि जी के बारे में बता दे कि कवि डॉ प्रेमसागर पाण्डेय भोजपुर जिले के शाहपुर प्रखंड के भीमपट्टी गाँव के रहने वाले हैं जिनका कर्मभूमि आरा मुख्यालय हैं।वर्तमान में कवि जी हिंदी साहित्य के सेवा सह समाजिक कार्यों में लिप्त हैं जिनके जीवन का उद्देश्य समाज को एक बेहतर मार्ग देना है और हर इंसान के अंदर इंसानियत को जिंदा करना हैं।ताकि समाज को एक मार्मिक स्नेह के बन्धन में बाँध कर सुदृणित किया जा सके।कवि जी अब तक 20 से 21 राज्यो में काव्य-पाठ कर अपने शहर को गौरवपूर्ण स्थान पर स्थान्तरित कर चुके है।बता दे कि कवि जी अब देश से बाहर भी जाने वाले जैसी की पूर्व सूचना प्राप्त हुई।अगले महीने नेपाल में अपना काव्य-पाठ कर देश की शान बढ़ाएंगे।कवि जी के कार्यो से परिवार सहित सामाजिक लोग आंतरिक रूप से बहोत खुश रहते हैं।जिनमे पिता भरत पाण्डेय,शिवजी पाण्डेय,नितेश पाण्डेय,हरेश पाण्डेय,गुड्डू ओझा,हिराकान्त ओझा,विनीत सिंह,श्रेया,प्रभु,स्वाति,राजेश,शिवाजीत आदि।

0 Response to "गंगा किनारे,गजल पुकारे में जम गये कवि डॉ प्रेमसागर"

एक टिप्पणी भेजें

advertising articles 2

Advertise under the article