डॉ. दयानिधि को ‘राष्ट्र रत्न सम्मान 2026’ से सम्मानित किया गया
प्रयोगशाला में जीवन की पहली कड़ी—भ्रूण—तैयार करने वाले एम्ब्रियोलॉजिस्ट डॉ. दयानिधि को शिक्षक दिवस पर नई दिल्ली में मिला राष्ट्रीय सम्मान
नई दिल्ली/पटना: आईवीएफ और एम्ब्रियोलॉजी के क्षेत्र में 17 वर्षों से अधिक समय से कार्यरत डॉ. दयानिधि को स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवाओं में उत्कृष्ट योगदान के लिए ‘राष्ट्र रत्न सम्मान 2026’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान 5 सितंबर 2026, शिक्षक दिवस के अवसर पर कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया, संसद मार्ग, नई दिल्ली में आयोजित समारोह में प्रदान किया गया।
आईवीएफ में एम्ब्रियोलॉजिस्ट कौन होते हैं?
आईवीएफ उपचार में डॉक्टर मरीज का इलाज करते हैं, लेकिन अंडाणु और शुक्राणु से प्रयोगशाला में भ्रूण तैयार करने, उसकी देखभाल करने और गर्भधारण के लिए सबसे उपयुक्त भ्रूण चुनने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी एम्ब्रियोलॉजिस्ट की होती है।
इसीलिए एम्ब्रियोलॉजिस्ट को आसान भाषा में ‘एम्ब्रियो मेकर’ या आईवीएफ प्रयोगशाला का वह वैज्ञानिक कहा जा सकता है, जिसके हाथों में अंडाणु और शुक्राणु मिलने से लेकर भ्रूण बनने तक की पूरी यात्रा होती है। निषेचन, आईसीएसआई, भ्रूण का विकास, उसकी गुणवत्ता की जांच, भ्रूण को सुरक्षित रखना और स्थानांतरण के लिए उचित भ्रूण का चयन—ये सभी एम्ब्रियोलॉजिस्ट के प्रमुख कार्यों में शामिल हैं।
डॉ. दयानिधि ने इसी अत्यंत सूक्ष्म और जिम्मेदारी भरे क्षेत्र को अपना जीवन समर्पित किया है।
17 वर्षों से अधिक का सफर, एक लाख से अधिक अंडाणुओं पर आईसीएसआई
डॉ. दयानिधि को आईवीएफ एवं एम्ब्रियोलॉजी के क्षेत्र में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव है। अपने लंबे व्यावसायिक सफर में वे एक लाख से अधिक अंडाणुओं पर आईसीएसआई कर चुके हैं और 15,000 से अधिक भ्रूण स्थानांतरण प्रक्रियाओं से जुड़े हैं!
डॉ. दयानिधि भारत के पहले एम्ब्रियोलॉजिस्ट हैं जिन्होंने क्लिनिकल एम्ब्रियोलॉजी में स्नातकोत्तर शिक्षा के साथ इसी विषय में पीएचडी की। वे कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज, मणिपाल विश्वविद्यालय के स्वर्ण पदक विजेता भी रहे हैं।
उनका योगदान केवल आईवीएफ प्रयोगशाला तक सीमित नहीं है। उनके 10 से अधिक सूचीबद्ध वैज्ञानिक शोध-पत्र प्रकाशित हो चुके हैं और वे अब तक 200 से अधिक एम्ब्रियोलॉजिस्टों को प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन दे चुके हैं।
वर्तमान में डॉ. दयानिधि इंदिरा आईवीएफ हॉस्पिटल लिमिटेड, पटना में केंद्र प्रमुख हैं। वे इंडियन फर्टिलिटी सोसाइटी, बिहार अध्याय के संयुक्त सचिव भी हैं।
इसके अतिरिक्त वे बिहार राज्य सहायक प्रजनन तकनीक एवं सरोगेसी बोर्ड में एम्ब्रियोलॉजी सदस्य, एकेडमी ऑफ क्लिनिकल एम्ब्रियोलॉजिस्ट्स के वर्ष 2026–28 के सहयोजित सदस्य तथा बिहार में इंदिरा आईवीएफ की संस्थागत नैतिकता समिति के सदस्य के रूप में भी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
सम्मान प्राप्त करने के बाद डॉ. दयानिधि ने कहा:
“शिक्षक दिवस पर ‘राष्ट्र रत्न सम्मान’ प्राप्त करना मेरे लिए विशेष रूप से भावनात्मक है। प्रयोगशाला में भ्रूण बनने से लेकर किसी परिवार के माता-पिता बनने के सपने तक की यात्रा का हिस्सा बनना अपने आप में बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। इस सफर में मेरे शिक्षकों और मार्गदर्शकों की शिक्षा, परिवार एवं सहकर्मियों का सहयोग और मरीजों का विश्वास मेरी सबसे बड़ी ताकत रहा है। मैं यह सम्मान उन सभी को समर्पित करता हूं।”
‘राष्ट्र रत्न सम्मान 2026’ डॉ. दयानिधि के 17 वर्षों से अधिक के उस सफर का सम्मान है, जिसमें विज्ञान, आईवीएफ, एम्ब्रियोलॉजी, शोध, प्रशिक्षण और हजारों परिवारों के माता-पिता बनने के सपने एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

0 Response to "डॉ. दयानिधि को ‘राष्ट्र रत्न सम्मान 2026’ से सम्मानित किया गया"
एक टिप्पणी भेजें