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संस्कारों की जीत: चक्रपाणि स्कूल के उत्सव में गूंजा लाडो का संदेश— 'डिग्री से ज्यादा नेक इंसान बनना है ज़रूरी', मंत्री जी ने थपथपाई पीठ ।

संस्कारों की जीत: चक्रपाणि स्कूल के उत्सव में गूंजा लाडो का संदेश— 'डिग्री से ज्यादा नेक इंसान बनना है ज़रूरी', मंत्री जी ने थपथपाई पीठ ।


राजगीर: "इतिहास गवाह है कि महान बनने के लिए उम्र की नहीं, बल्कि नेक इरादों की ज़रूरत होती है।" इसी सोच को हकीकत में बदलते हुए राजगीर स्थित चक्रपाणि रेजिडेंशियल स्कूल के चौथे वार्षिक उत्सव (4th Annual Function) में एक ऐसा ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला, जिसे वर्षों तक याद रखा जाएगा। कार्यक्रम में बिहार की पहली मिनी मॉडल और भारत की सबसे छोटी समाजसेवी के रूप में विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना चुकीं लाडो बनी पटेल बतौर सेलिब्रिटी गेस्ट शामिल हुईं, जिन्होंने अपनी प्रेरणादायक उपस्थिति से पूरे माहौल को ऊर्जा से भर दिया।



विदेशी मेहमानों के बीच नन्ही प्रेरणा

इस भव्य आयोजन की गरिमा तब और बढ़ गई जब इसमें न केवल स्थानीय गणमान्य व्यक्ति, बल्कि विदेश से आए विशेष अतिथियों ने भी शिरकत की। अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बना चुकीं 10 साल की लाडो ने जब मंच से बच्चों को सफलता का मंत्र दिया, तो विदेशी मेहमान भी उनकी परिपक्वता और समाज सेवा के प्रति उनके जज्बे को देखकर दंग रह गए। उन्होंने लाडो के कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें भविष्य की एक महान ग्लोबल लीडर बताया।


डिग्री से पहले 'इंसानियत': लाडो का भावुक संदेश

कार्यक्रम के दौरान लाडो ने अपनी माँ द्वारा दिए गए संस्कारों का जिक्र करते हुए एक बहुत ही गहरी और भावनात्मक बात कही। लाडो ने मंच से बच्चों को संदेश दिया:


"मेरी मम्मी अक्सर मुझसे एक ही बात कहती हैं कि जीवन में डिग्री से ज्यादा एक अच्छा इंसान बनना ज़रूरी है। जिस दिन आप एक अच्छे और नेक दिल इंसान बन गए, कामयाबी खुद-ब-खुद आपके कदम चूमेगी। इसलिए हमें हर काम पूरी ईमानदारी और नेकदिली से करना चाहिए।"


लाडो की इस बात ने वहां मौजूद हर अभिभावक और अतिथि का दिल जीत लिया। यह संदेश दिखाता है कि उनकी सफलता की नींव किताबी ज्ञान से कहीं ज्यादा उनके ऊंचे संस्कारों पर टिकी है।


200 अवार्ड्स और माँ रागिनी पटेल का तप

मात्र 10 साल की उम्र में लाडो ने 200 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अवार्ड्स जीतकर एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है जो अपने आप में एक इतिहास है। इस ऐतिहासिक कामयाबी के पीछे उनकी माँ, प्रसिद्ध समाज सेविका रागिनी पटेल का अटूट समर्पण और बेहतरीन मार्गदर्शन है। आज यह उन्हीं की परवरिश का असर है कि लाडो 'लाडो की पाठशाला' जैसी पहल के जरिए समाज के वंचित बच्चों को शिक्षित कर रही हैं। समाज में आज रागिनी पटेल की पहचान उनकी बेटी के महान कार्यों से होने लगी है।


माननीय मंत्री श्री श्रवण कुमार जी की सराहना

इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि (Chief Guest), बिहार सरकार के ग्रामीण विकास एवं परिवहन मंत्री श्री श्रवण कुमार जी ने लाडो की प्रतिभा, उनके हौसले और उनकी सेवा भावना की जमकर तारीफ की। उन्होंने मंच से लाडो को अपना स्नेहपूर्ण आशीर्वाद देते हुए कहा कि इतनी कम उम्र में समाज के प्रति ऐसी सक्रियता प्रेरणादायक है। मंत्री जी ने 'लाडो बनी फेस क्लब ट्रस्ट' (LBFC Trust) के कार्यों को भी सराहा और उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं।


भविष्य का लक्ष्य: IAS बनने का सपना और 'गेम एकेडमी'

लाडो ने साझा किया कि उनका सपना IAS अधिकारी बनकर देश की सेवा करना है। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए 'लाडो बनी फेस क्लब ट्रस्ट' ने चक्रपाणि स्कूल के साथ मिलकर एक आधुनिक 'गेम एकेडमी' शुरू करने का संकल्प लिया है, ताकि बिहार के बच्चे खेलों में भी विश्व स्तर पर इतिहास रच सकें।

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