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लोनी विद्युत विभाग में ‘अंधेर नगरी चौपट राजा

लोनी विद्युत विभाग में ‘अंधेर नगरी चौपट राजा


हाईकोर्ट के आदेश हवा में, फाइल गायब, मीडिया को देख भागे अधिकारी, अब फोन भी बंद



लोनी (गाजियाबाद):

उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) का लोनी विद्युत विभाग इन दिनों बिजली आपूर्ति नहीं, बल्कि **मनमानी, भ्रष्टाचार और जवाबदेही से पलायन** के कारण चर्चा में है। राजीव गार्डन, शुकर बाज़ार निवासी **नीरज पुत्र राजवीर** का मामला विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।



पीड़ित के अनुसार, वर्ष **2022 में मात्र एक तार की फोटो के आधार पर बिजली चोरी का झूठा आरोप** लगाते हुए लगभग **₹2,00,000/- का जुर्माना** लगाया गया था। इस कार्रवाई को नीरज ने **माननीय इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी**, जहां कोर्ट ने बिजली विभाग से पूरा रिकॉर्ड व जवाब **एक सप्ताह में प्रस्तुत करने का आदेश** दिया।


आरोप है कि—


* **न तो विभाग ने हाईकोर्ट में कोई फाइल पेश की**,

* **न ही कोई जवाब दाखिल किया**,

  जिसके बाद कोर्ट द्वारा **मामले में स्टे आदेश** पारित किया गया।


इसके बावजूद, **दिसंबर 2025 में अचानक नया नोटिस जारी कर जुर्माने की राशि बढ़ाकर ₹4,78,415/- कर दी गई** और बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के **घर का बिजली कनेक्शन काट दिया गया**।




### **2KW मीटर पर 5KW का फर्जी खेल**


नीरज का कहना है कि उनके **25 गज के मकान में केवल 2 किलोवाट का स्वीकृत मीटर** लगा है, जबकि विद्युत विभाग द्वारा **5 किलोवाट का लोड दर्शाकर ₹4,78,415/- का भारी-भरकम चालान थोप दिया गया। सवाल यह है कि 25 गज के आवासीय मकान में 5KW लोड किस तकनीकी आधार पर तय किया गया?


सबसे गंभीर आरोप यह है कि **घर के मालिक की अनुपस्थिति में**, केवल उनकी पत्नी के मौजूद रहते **विभागीय कर्मचारियों ने घर पर पहुंचकर बिजली कनेक्शन काटा और अभद्र भाषा का प्रयोग किया**, जो महिला सुरक्षा व विभागीय नियमों का खुला उल्लंघन 


जब पीड़ित समाधान के लिए इंद्रापुरी स्थित एक्शन ऑफिस पहुंचा, तो एक सप्ताह तक केवल टालमटोल की गई

बाद में जब एक पत्रकार पीड़ित के साथ कार्यालय पहुंचे तो—


चार घंटे तक बैठाने के बाद भी फाइल नहीं दिखाई 

* और आरोप है कि **एक्शन इंचार्ज मनोज कुमार मीडिया को देखकर कार्यालय से निकलकर चले गए

  इसके बाद उनका सरकारी फोन बंद कर देना, पूरे मामले को और भी संदिग्ध बनाता है।

पीड़ित का कहना है कि—


* विभागीय कर्मचारी ऑनलाइन भुगतान से मना करते हैं

* और नकद भुगतान का दबाव बनाते हैं

  जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की आशंका को मजबूत करता है।


पहले ₹2 लाख का झूठा केस, फिर कोर्ट के स्टे के बावजूद ₹4,78,415/- का नया जुर्माना।

> यह बिजली विभाग नहीं, बल्कि वसूली गिरोह बन चुका है।

> कोर्ट के आदेश नहीं मानते, फाइल गायब कर देते हैं और सवाल पूछो तो भाग जाते हैं या फोन बंद कर लेते हैं।

> अब हम इस पूरे मामले की शिकायत ऊर्जा मंत्री, मुख्यमंत्री पोर्टल और विजिलेंस विभाग में सबूतों के साथ कर रहे हैं।”


स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि


हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना की निष्पक्ष जांच हो

* ₹4,78,415/- के फर्जी जुर्माने की तकनीकी ऑडिट कराई जाए

* फाइल गायब करने वाले अधिकारियों पर विजिलेंस कार्रवाई हो,

* और पीड़ित का **तत्काल बिजली कनेक्शन बहाल कर न्याय दिया जाए।


यह मामला केवल एक उपभोक्ता का नहीं, बल्कि पूरे लोनी क्षेत्र में बिजली विभाग की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।

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