मुंबई में 'श्री पुरुषोत्तम परिवार' के भव्य श्री हरिहर महापूजा में उमड़ा आस्था का महासैलाब
सनातन धर्म की 19 वर्षों की सतत सेवा का प्रतीक बना 151 मण्डपात्मक सामूहिक श्री सत्यनारायण व्रत कथा एवं श्री हरिहर भगवान महापूजा, हजारों श्रद्धालुओं, जनप्रतिनिधियों और समाज के विभिन्न वर्गों की रही सहभागिता
मुंबई:
वर्ष 2007 में एक छोटे से आध्यात्मिक प्रयास के रूप में शुरू हुआ सफर आज मुंबई
के सबसे प्रतिष्ठित और विशाल धार्मिक आयोजनों में शामिल हो चुका है। श्री पुरुषोत्तम
परिवार (मुंबई) ने अपनी 19 वर्षों की सतत आध्यात्मिक एवं सामाजिक सेवा पूर्ण
करते हुए बोरीवली (पूर्व) स्थित गोपालजी हेमराज स्कूल परिसर में 151 मण्डपात्मक
सामूहिक श्री सत्यनारायण व्रत कथा एवं श्री हरिहर भगवान महापूजा का भव्य आयोजन
किया, जिसमें मुंबई और आसपास के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु, जनप्रतिनिधि,
उद्योगपति, व्यापारी और समाज के प्रतिष्ठित नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए।
श्री पुरुषोत्तम परिवार की स्थापना वर्ष 2007
में प्रख्यात आध्यात्मिक गुरु, विद्वान एवं ज्योतिषाचार्य पंडित कन्हैया द्विवेदी
द्वारा सनातन संस्कृति के संरक्षण, सामूहिक उपासना और समाज में आध्यात्मिक जागरूकता
के उद्देश्य से की गई थी। पिछले उन्नीस वर्षों में यह संगठन एक छोटे धार्मिक प्रयास
से आगे बढ़कर जन-आस्था का सशक्त माध्यम बन चुका है। प्रत्येक तीन वर्ष में पुरुषोत्तम
मास (अधिक मास) के अवसर पर आयोजित होने वाला श्री हरिहर महापूजा आज मुंबई
के सबसे प्रतिष्ठित सामूहिक धार्मिक आयोजनों में अपनी विशेष पहचान बना चुका है।
इस वर्ष के आयोजन में 151 मण्डपों में सामूहिक श्री सत्यनारायण
व्रत कथा का आयोजन किया गया, जबकि 1,51,000 बिल्वपत्रों एवं पवित्र तुलसी दल
से भगवान श्री हरिहर का सामूहिक अभिषेक श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र
रहा। वैदिक मंत्रोच्चार, भक्ति गीतों और सामूहिक प्रार्थनाओं से पूरा परिसर भक्तिमय
वातावरण में सराबोर रहा तथा विश्व शांति, समाज कल्याण और पारिवारिक सुख-समृद्धि की
मंगलकामनाएँ की गईं।
संगठन की उन्नीस वर्षीय यात्रा को याद करते हुए श्री पुरुषोत्तम
परिवार के संस्थापक पंडित कन्हैया द्विवेदी ने कहा, "जब हमने वर्ष
2007 में श्री पुरुषोत्तम परिवार की शुरुआत की थी, तब हमारा उद्देश्य केवल समाज को
भक्ति के माध्यम से जोड़ना और सनातन धर्म के शाश्वत मूल्यों का संरक्षण करना था। आज
उन्नीस वर्षों बाद हजारों श्रद्धालुओं को एक साथ देखकर अपार संतोष और ईश्वर का आशीर्वाद
महसूस होता है। यह यात्रा किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि हर उस श्रद्धालु, स्वयंसेवक
और परिवार की है, जिसने इस संकल्प पर विश्वास किया।"
आयोजक अमृतलाल मिश्रा ने कहा कि इस महाआयोजन की सफलता महीनों
की तैयारी और सैकड़ों स्वयंसेवकों की निस्वार्थ सेवा का परिणाम है।
"हर बार आयोजित होने वाला यह महापूजा केवल एक कार्यक्रम नहीं
बल्कि सेवा, समर्पण और सामूहिक प्रयास का उत्सव है। हमारा प्रयास रहता है कि प्रत्येक
श्रद्धालु यहाँ से आध्यात्मिक संतोष और सुखद अनुभव लेकर जाए। श्रद्धालुओं का यह स्नेह
हमें आगे भी इसी समर्पण के साथ कार्य करने की प्रेरणा देता है।"
आयोजन को सफल बनाने में विनोद तिवारी, शिवभूषण शुक्ला, गुरुदेव
मिश्रा, नामवर चौबे, नीरज शुक्ला, रविंद्रनाथ तिवारी, नागेन्द्र मिश्रा तथा रामबचन
सिंह (दहिसर) सहित पूरी आयोजन समिति ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने संयुक्त
रूप से कहा, "हर महापूजा हमें यह सिखाती है कि सेवा ही सबसे बड़ी साधना है।
श्रद्धालुओं का बढ़ता विश्वास हमारी सबसे बड़ी प्रेरणा है और हम इस परंपरा को आने वाली
पीढ़ियों तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"
इस भव्य धार्मिक आयोजन में कई प्रमुख जनप्रतिनिधियों ने भी अपनी
उपस्थिति दर्ज कराई। पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी, बोरीवली विधायक संजय उपाध्याय, मगाठाणे
विधायक प्रकाश सुर्वे
तथा शिवसेना विभाग प्रमुख राम यादव ने भगवान श्री हरिहर के दर्शन कर पूजा-अर्चना
की और श्री पुरुषोत्तम परिवार को उन्नीस वर्षों की सफल आध्यात्मिक यात्रा के लिए शुभकामनाएँ
दीं। उन्होंने समाज में सनातन संस्कृति, धार्मिक समरसता और सामाजिक एकता को सुदृढ़
करने के लिए संगठन के प्रयासों की सराहना की।
कार्यक्रम में मुंबई के अनेक उद्योगपति एवं व्यापारी भी बड़ी संख्या
में उपस्थित रहे।
अपना फ्रूट मार्केट, बोरीवली के संचालक राजीव मिश्रा ने कहा, "यह
आयोजन हमारी आध्यात्मिक परंपराओं की शक्ति और समाज को जोड़ने वाली सनातन संस्कृति का
जीवंत उदाहरण है।"
वाशी के उद्योगपति प्रेमचंद जायसवाल ने कहा, "मैंने
इस आयोजन को वर्षों में विकसित होते देखा है। आयोजकों की निष्ठा और स्वयंसेवकों की
सेवा भावना ने इसे जन-जन का विश्वास बना दिया है।"
बोरीवली के व्यवसायी राजेश जायसवाल ने कहा, "हजारों
श्रद्धालुओं के बीच इतने अनुशासित और सुव्यवस्थित आयोजन के लिए पूरी आयोजन समिति बधाई
की पात्र है।"
वाशी एपीएमसी मार्केट से जुड़े व्यवसायी रामानंद जायसवाल
ने कहा, "सामूहिक प्रार्थना समाज को जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम है। ऐसे
आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत को और मजबूत करते हैं।"
फल व्यापार से जुड़े रूपेश गुप्ता ने कहा, "पूरे
आयोजन में वर्षों का अनुभव, समर्पण और सेवा भावना स्पष्ट दिखाई दी। हर श्रद्धालु ने
आत्मीयता का अनुभव किया।"
व्यवसायी दिनेश जायसवाल, रामाशंकर दुबे और मनोज सत्यनारायण जायसवाल ने संयुक्त
रूप से कहा कि श्री पुरुषोत्तम परिवार समाज को जोड़ने और सनातन संस्कृति को नई पीढ़ी
तक पहुँचाने का सराहनीय कार्य कर रहा है।
रियल एस्टेट व्यवसायी संतोष शुक्ला ने कहा, "आज के
समय में ऐसे आयोजन परिवारों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण
माध्यम बन रहे हैं।"
मुंबई के बिल्डर रौशन मालू ने कहा, "यह केवल धार्मिक
आयोजन नहीं, बल्कि समाज को एक सूत्र में पिरोने वाला सांस्कृतिक अभियान है, जिसकी जितनी
सराहना की जाए, कम है।"
आयोजन की सफलता में महिला मंडल की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण
रही। महिला सदस्यों ने श्रद्धालुओं के स्वागत, अतिथि सत्कार, स्वयंसेवकों के समन्वय
तथा विभिन्न व्यवस्थाओं का जिम्मा पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निभाया, जिसकी सभी
उपस्थित लोगों ने सराहना की।
पहली बार आयोजन समिति से जुड़े प्रशांत पांडेय ने अपने अनुभव
साझा करते हुए कहा, "श्री पुरुषोत्तम परिवार के साथ एक आयोजक के रूप में जुड़ना
मेरे लिए अत्यंत प्रेरणादायक अनुभव रहा। संस्थापक पंडित कन्हैया द्विवेदी जी तथा वरिष्ठ
आयोजकों के मार्गदर्शन में सेवा करने का अवसर मिला। मैं स्वयं को सौभाग्यशाली मानता
हूँ और आने वाले वर्षों में भी इस आध्यात्मिक यात्रा का हिस्सा बने रहने की कामना करता
हूँ।"
वर्ष 2007 में शुरू हुई यह यात्रा आज 19 वर्षों
बाद हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन चुकी है। संस्थापक पंडित कन्हैया
द्विवेदी के मार्गदर्शन, आयोजकों के समर्पण, सैकड़ों स्वयंसेवकों की निस्वार्थ
सेवा और हजारों श्रद्धालुओं के विश्वास ने श्री पुरुषोत्तम परिवार को मुंबई
के सबसे प्रतिष्ठित आध्यात्मिक संगठनों में स्थापित किया है। श्री हरिहर महापूजा
अब केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, सामाजिक एकता, सेवा और आध्यात्मिक
जागरण का एक सशक्त अभियान बन चुका है, जो आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करता रहेगा।
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