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महिला सशक्तिकरण और सार्वजनिक नेतृत्व में समान अधिकार का आह्वान

महिला सशक्तिकरण और सार्वजनिक नेतृत्व में समान अधिकार का आह्वान


लखनऊ। आज के बदलते भारत में महिला केवल सशक्त ही नहीं, बल्कि हर क्षेत्र में निर्णायक भूमिका निभा रही है। शिक्षा, प्रशासन, विज्ञान, प्रबंधन, रक्षा और समाज सेवा—हर मोर्चे पर महिलाओं ने यह सिद्ध कर दिया है कि नेतृत्व क्षमता किसी लिंग की मोहताज नहीं होती।

सरोजिनी नगर, लखनऊ से समाजसेवी एवं जननेता दुर्गेश यादव जी का दृढ़ विश्वास है कि यदि महिलाओं को सार्वजनिक नेतृत्व में समान अवसर और अधिकार दिए जाएँ, तो वे राष्ट्र को और अधिक संवेदनशील, समावेशी एवं प्रगतिशील दिशा में ले जा सकती हैं। उनके अनुसार, महिलाओं में निर्णय लेने की क्षमता, सहानुभूति, अनुशासन और दीर्घकालिक सोच जैसे गुण स्वाभाविक रूप से होते हैं, जो सुशासन की मजबूत नींव रखते हैं।

दुर्गेश यादव जी का मानना है कि महिला नेतृत्व केवल महिला सशक्तिकरण का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का प्रश्न है। जब आधी आबादी नीति-निर्माण और निर्णय प्रक्रिया में बराबरी से शामिल होगी, तभी लोकतंत्र वास्तव में मजबूत होगा। वे कहते हैं कि महिलाओं को राजनीति और सार्वजनिक नेतृत्व में आगे लाने से न केवल नीतियाँ अधिक जनोन्मुखी होंगी, बल्कि समाज में समानता और न्याय की भावना भी सुदृढ़ होगी।

इस अवसर पर उन्होंने युवतियों और महिलाओं से आगे आने, नेतृत्व की भूमिका निभाने और देश की दिशा तय करने में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। साथ ही समाज से यह अपील की कि वह महिलाओं को केवल अवसर ही नहीं, बल्कि विश्वास और सम्मान भी दे।

“महिला का सशक्त होना ही राष्ट्र का सशक्त होना है। जब नेतृत्व में नारी होगी, तब नीति में संवेदना होगी और विकास में संतुलन होगा।”

— दुर्गेश यादव, सरोजिनी नगर, लखनऊ

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